साहित्य
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दि ग्राम टुडे एक बार फिर शिखर पर
दि ग्राम टुडे एक बार फिर शिखर पर। ऐसा कहते हुए मैं अति गौरवान्वित हूँ। होली विषय पर आधारित नव्य…
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वसन्त के स्वागत में दो छ्न्द
आयो है ऋतुराज वसन्त , धरा पै राज करन की है ठानी, आम के बौरौं में फूल्यो फिरै अरु, भ्रमरन…
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फागुन
***************************** फागुन के रॅंग में रॅंगे,धरा प्रकृति आकाश। होली में सब मस्त हैं, टेसू संग पलाश।। टेसू संग पलाश,गंध महुआ…
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ये देखना है माना जबसे तुमको अपना
माना जबसे तुमको अपना । अब काहे का दुख में तपना ।। दूर हुए हैं दुख अब सारे । अब…
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होली की हार्दिक शुभ कामनाएं!
जी रया, जागि रया, बचि रया, इन दिन मासौं कें तम भेटने रया। दुब कि जै परि तुम फैल जया,…
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पतझड़
(१) पीत वसन धर वृक्ष खड़े, सूनी हर इक डार, झरते पात सुनाते हैं, जीवन का व्यवहार। आज हरे जो…
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मजमा
चेहरा छुपा रही है हमसे ज़िन्दगी क्या-क्या दिखा रही है हमें ज़िन्दगी!! जिससे वफ़ा की थी उम्मीद ग़ैर के साथ…
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ख्वाबों की रानी
ख्वाबों की तुम हो मेरे दिल की पटरानी हकीकत की दुनियाँ में बन जा प्रेम कहानी मैं तुमसे अपनी…
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भरोसेलाल का भरोसा–(हास्य-व्यंग्य)
मैं भरोसेलाल एक भरोसे का आदमी हूँ। कोई भी चिकनी चुपड़ी बातें की। उस पर सर्वत्र न्योछावर कर देने की…
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संस्मरण मेरी साहित्यिक यात्रा – सुधीर श्रीवास्तव से यमराज मित्र तक
विद्यार्थी जीवन में अखबार पढ़ने की आदत और कहानियां, कविता के लेखकों की तरह अपना नाम देखने का लोभ मेरी…
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