साहित्य
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संस्मरण मेरी साहित्यिक यात्रा – सुधीर श्रीवास्तव से यमराज मित्र तक
विद्यार्थी जीवन में अखबार पढ़ने की आदत और कहानियां, कविता के लेखकों की तरह अपना नाम देखने का लोभ मेरी…
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मुझे अच्छे से याद है
कह के ख़ुशबू को, तेरी याद, बुलाई हमने,तंज सुनके भी, ना फ़रियाद, मुझे अच्छे से याद है। तूने चाहा था,…
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होली-“ओज की होली — प्रेम की बोली”
रंगों से बढ़कर दिलों को, रंगने का संकल्प करो, होली आई है प्रेम से, जीवन को आलोकित करो। नफरत की…
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फागुन का त्यौहार
फागुन का त्यौहार मनाये रंगों की सुन्दरता बरसाये मिष्ठानो का आनंद उठाए संग सुन्दर संदेश फैलाये अग्नि में प्रह्लाद ले…
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ग़ज़ल
भटकती ज़िन्दगी से वास्ता था मेरा भी तिश्नगी से वास्ता था। फ़कत चेहरे मुझे लगते सियासी, उन्हें बस बंदगी से…
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कुलदीप सिंह रुहेला
मेरी हिंदी को भी समझो ज़रा, ओ अंग्रेज़ी वालो, ये मेरी मातृभाषा है, दिल की उजली लालो। तुम सूट-बूट में…
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बाधाएं-अड़चनें
भाग्य में जो लिखे प्रभु हैं, वही आता सबके सामने। कठिनाइयों के डर से भाई,कदापि लगें मत भागने।। बड़ी परीक्षा…
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गज़ल
बहुत कोशिशें की हॅंसाना नही है। किसी को अकारण सताना नहीं है।। — तुम्हारे मिलन की हरीच्छा अधूरी, मुहब्बत मुझे…
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आओ चलें, भगोरिया मनाएँ
जब बसंत पहाड़ियों पर धीरे से झुकता है, भगोरिया मिट्टी से रंग बनकर उठता है। पेड़ों से पहले गलियाँ खिल…
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अगर तुम साथ हो
जुबां पर है बस एक बात, अगर तुम साथ हो तो फिर चिंता की क्या होगी बात! निर्द्वन्द्व, निर्भीक, बहती…
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