साहित्य
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तमन्ना
अब और नहीं जीने की तमन्ना ही नहीं किसको दे हम दोष अपनी नाकामी का, कोई हम ख़्याल हमको मिला…
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हरी-हरी नोटों का चमत्कार–हास्य-व्यंग्य
मैं मिश्रीलाल लिखने वाला घूस तो दे नहीं सकता। हाथ जोड़ विनती कर सकता हूँ। मैं विनम्रता पूर्वक एक अधिकारी…
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एक दिन कहानी बन कर चले जाओगे
** एक दिन कहानी बन कर चले जाओगे। लिखोगे अच्छी तो सबको ही याद आओगे।। ** दिल में जगह बना…
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जय मां हंसवाहिनी
चली वासंती बयार,छेड़ा माँ ने सितार धरती अंबर में गूँजे ,सुरों की झंकार चली…. हंसती है धरती , नव पल्लव…
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पूर्णिका
प्रारंभी नेह– कठिन राह पर चलना सीख लो दुःख में धीरज रखना सीख लो // नेह– (1) अंधी आँधी चलती…
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ऐ तन मन धन
ऐ मेरे प्यारे तन मन धन , तेरा सबसे प्यारा वतन । वतन हेतु है जीना मरना , तू ही…
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ख़ुशियों की चाभी सफलता देती है
सफलता की चाभी से ख़ुशी नहीं मिलती, परंतु ख़ुशियों की चाभी सफलता देती है, हम जो कुछ करते हैं, यदि…
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ये आदमी मशीन होते हैं
ये आदमी मशीन होते हैं, दिन-रात पसीने में लीन होते हैं। सीने में जलता है एक सूरज, पर चेहरे पर…
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कभी-कभी
वह चाहती थी बस इतना सा, कि कोई उसकी खामोशी पढ़ ले, शब्दों में जो न उतर सका दर्द, उसे…
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हास्य की फुहारों और व्यंग्य के तीरों से सजी २३७वीं कल्पकथा साप्ताहिक काव्यगोष्ठी
प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, सद साहित्य, हेतु कृत…
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