साहित्य

  • राम-कृष्ण का प्यारा भारत

    अच्छे कर्मों से ही मानव, अपनी पहचान बनाना। परहित की हो भरी भावना, वंचित को गले लगाना।। विश्व पटल पर…

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  • मन में टीस

    मासूम सा बचपन दिल में बैठा कर रहा है जंग, यादों का कारवाँ हरदम चलने से हो गए हम तंग।…

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  • बजरंगी अब आएंगे

    गये कहाँ थे बजरंगी,जो बजरंगी अब आएंगे। अंतस के नैना खोलकर देखो, बजरंगी सर्वत्र हैं।। भक्तों का उद्धार करें, बिगड़े…

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  • लघुकथा “सेवानिवृत्त वरिष्ठ जन”

    सोमेश आज सर्वोच्च अधिकारी के पद पर प्रमोशन पाकर अत्यंत प्रसन्न था…. अपनी सफलता का श्रेय उसने अपने परिवारजनों, बुजुर्गों…

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  • डॉ रामशंकर चंचल

    अक्सर खुब सुरत लोग उह भ्रम में रहते हैं कि वो खूब सूरत है जबकि कोइ भी व्यक्ति हो वह…

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  • गज़ल

    तुम्हारी बिन इजाजत प्यार को स्वीकार करता क्या। तुम्हें अपना बनाने के लिए इकरार करता क्या।। बनाई है धरा अंबर…

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  • न घर का रहा न घाट का—हास्य-व्यंग्य

    एक साहित्यिक संस्था के मेरे परिचित एडमिन जी हैं। बहुत उदार ह्रदय। करूणा का सागर छलकता है। जो उनसे मिल…

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  • जीने की सीख

    रात तनहाई ने फिर जगा दिया ख़्वाब बनकर कोई खिड़की से आ गया!! सोचा फिर कौन मेरा अपना है अलावा…

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  • सूरज

    सात घोड़ों का है रथ तुम्हारा जग की आत्मा,तुम्हें पुकारा नवग्रह राजा का, पद प्राप्त सूरज सम्पूर्ण जग में व्याप्त…

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  • भोले आ गए रे …..

    भोले तो आंगन में आ गए रे, आकर सभी को बुला रहे रे, भोले तो आंगन में आ गए रे……

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