साहित्य
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माँ सा ना कोई और
माँ की ममता प्यारी, माँ सा ना कोई और, वह ममता बरसाए ,हर पल बच्चो की ओर , रामा हो,…
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अलविदा वर्ष दो हज़ार पच्चीस
अलविदा वर्ष दो हज़ार पच्चीस मित्रो वर्ष दो हज़ार पच्चीस के अलविदा होने का समय आ गया, आप सभी का…
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जीवन में नव प्रकाश
कुछ मीठे कुछ रंग-रँगीले, लेकर ये आभास आ गया। नया साल ऐसा लगता है, मानो नव मधुमास आ गया।। बीते…
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माँ की यादों की बरसात
तेरे बिना की इस सुबह को मैं अब स्वीकार नहीं कर पा रहा हूँ माँ..! रसोई के चिराग़ अब रौशन…
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प्रभू की सद्कृपा हम सबको मिले
कितनी अद्भुत तारीख़ आज है, वर्ष और माह का अंतिम दिन है, कल वर्ष, माह का प्रथम दिन है, नव…
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पर घर मे सिसकती माई हैँ
हर नवरात्रि शेरावाली आई हैँ, पर घर मे सिसकती माई हैँ, आज रिश्तो की डोर क्यों तंग हो रही, जिसने…
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वो खुशनुमा शाम
वर्ष का अंतिम दिन और वो खुशनुमा शाम कैसे भूल सकते हम कितने करीब थे हम एक ,दूसरे को किसी…
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नहीं काम आई
नहीं काम आई किसी के विरासत असंतोष फूटा हुई है बगावत l पसीने से तर थे बदन देख सारे हुई…
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वह साहित्यकार.
घर में दरिंदा कविता में करुणावान। व्यक्ति दोगला क्यों होता भगवान्।। भीतर घृणा भरी,पर बाहर मधुरता। दोगलापन करने से वह…
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ममता
भीख मांगती एक उम्रदराज मां से पूछा- इस उम्र में तो नाती-पोतो के साथ खिलखिलाना चाहिये घर में बने चाय…
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