साहित्य
-
(no title)
खामोशियों की चादर हटकर, चलो कुछ बात करते हैं, सपनों के किसी कोने में, फिर मुलाकात करते हैं। दिल के…
Read More » -
पूर्णिका-गणतंत्र के साये में
गणतंत्र सदा अपने जीवन में मनाते रहेंगे। जीवन अधूरा कर गये नाम हम गाते रहेंगे।। वीर था सपूत वह माँ…
Read More » -
हंसी ठहाके गुम अब रिवाज है झूठी मुस्कान का
********** हंसी ठहाके गुम अब रिवाज है झूठी मुस्कान का। स्वार्थी रिश्ते आदमी निभाता देख नफा-नुकसान का।। ********* निस्वार्थ निश्चल…
Read More » -
नाहक बहक रहे
पक्षी तक गणतंत्र दिवस पर नभ में चहक रहे। स्वार्थ के वशीभूत कई खग नाहक बहक रहे। पेड़ों पर बैठी…
Read More » -
जय जननी, जय भारत माँ
जय जननी, जय भारत माँ शत-शत नमन तुम्हें जय जन्म भूमि, जय कर्म भूमि शत बार नमन तुम्हें!…. तेरी गोदी…
Read More » -
वादा किया तो….
जो कहा है उसे करना, यही इंसान की शान है, लफ़्ज़ नहीं खिलौने होते, इनमें लफ़्ज़ों की जान है। वादों…
Read More » -
चाहत की पंख
चाहत की पंख लगा बन जा जाबांज ग़गन में उड़ जा बन कर तुँ परवाज दृढ़ इच्छाशक्ति को करना है …
Read More » -
ये प्यार की बातें, मैं और तुम
ये प्यार की बातें, मैं और तुम, खामोशी बोले, मैं और तुम। सांझ की चादर, तारों की धुन, दिल की…
Read More » -
आदिवासी सृजन मसीहा डॉ रामशंकर चंचल
इतिहास रचना कोई आसान बात नहीं आदिवासी सृजन मसीहा जैसे सम्मान पर दस्तक देना जीवन में कोई भी किसी भी…
Read More » -
एल्बर्ट इक्का
जमा दिया था युद्ध मे अपने शौर्य का सिक्का झारखंड का लाल था वो था वो एल्बर्ट इक्का।। इकहत्तर की…
Read More »