साहित्य

  • अतिथि नववर्ष का स्वागत

    प्रिय आंग्ल नववर्ष, नमस्कार तुम्हें प्रणाम, हर बरस आते हो तुम, कहलाते फिर भी “नव” नाम। भारतीय परंपरा में अतिथि…

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  • पूस की रात

      पूस की रात थी फुटपाथ पर सोया था अपनी मां के साथ छोटा बच्चा भयंकर कंपकंपाहट एक फटी चादर…

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  • पूस की सर्द हवाएँ

    सर्द हवाएँ पूस की कंपा रही है तन -मन , धुंधली होती जा रही है धूप भी दिन ब दिन…

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  • सुनहरी यादें बीते साल की

    सुनहरी यादें बीते साल की हम भुला न पायेंगे ईसवी सन् नए साल की भी खुशियाँ मनायेंगे। तारे आसमान से…

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  • खामोश रहो कुछ न कहो

    खामोश रहो कुछ न कहो, लबों पे बस मुस्कान रखो। अल्फ़ाज़ कभी बोझ बनें तो, ख़ामोशी को पहचान रखो। हवा…

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  • सच्चा प्यार

    प्यार की कोई भाषा नहीं होती । सच्चे प्यार की कोई परिभाषा नहीं होती । हर रिश्तें में पनपता है…

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  • मेरे एहसास

    कुछ एहसास महसूस किए जा सकते उन्हें शब्दों में बयां हम नहीं कर सकते ये एहसास सीमित नहीं होते ये…

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  • भोजपुरी क माटी

    भोजपुरिया माटी ह गीतन क, जहं कन कन संगीत लुभावेला। मउत हो जिनगी सुख दुःख कउनो, हरदी चंनन क लेप…

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  • गजल

    चाँदनी रात, ये जिंदगी हो गई, तू मुझे मिल गई, दिल्लगी हो गई। वो सुहानी हवा सी, बही इस कदर,…

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  • व्यंग

    “मज़ा आ गया, मज़ा आ गया, ख़ूब हस रहे हम, सुरुवा पिलाया के, बकरा हज़म।। डॉ नवीन मौर्या “फायर बनारसी…

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