साहित्य
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तेरी बाहों में जो ठहर जाए
सच कहती हूँ… जब भी थमती हूँ तुम्हारी इन बाहों में, मुझे फिर से वो ‘मंजर’ याद आता है। वो…
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भांजी शादी में शामिल न होने पर मामा की अभिव्यक्ति
शादी में मैं न आ सका, मन हर पल रोता जाता है, है दूर बहुत फिर भी ,सुख का सावन…
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चींटियों की एकता (बाल-कहानी)
एक बार जंगल के पास एक बड़ा सा लड्डू गिरा। वह इतना स्वादिष्ट और चमचमाता था कि आसपास की…
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साहिबज़ादों को करें नमन
कर ले आज नमन हम, गुरु गोविंद के सपूतों को, जिनके बलिदानों से, देश का महका हर गुलशन। इक्कीस से…
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कलम गई है जाग
कलम गई है जाग अब उगलेगी आग यही सोच रहे हैं सब लग रहा है कैसे दाग फन उठाकर घूमता…
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बूंद–शबनम की
वह आती है, इठलाती–बलखाती हुई कोमल कलियों के पास आकर उन्हें सहलाती है धीरे धीरे–आंख खोलते हैं, वो अपनी… फिर…
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दिसंबर (चौपाई)
मास दिसंबर ज्योंही आए। तन में आलस भर-भर जाए। चंदा सूरज नभ के तारे। गेह दुबक कर बैठे सारे ।।…
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जीवन के उस पार
जीवन के उस पार जीवन के उस पार कोई मौन दीप जलता है। जहाँ प्रश्न नहीं, केवल उत्तर ढलता है।…
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जीवन एक साधना
चल पड़ा हूँ मैं पथिक बन, ना गंतव्य का मोह, ना मंज़िल का गुमान। हर कदम पर अनुभव की रेखाएँ…
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नज़्म
आख़िर मैं रफ़्ता रफ़्ता उसके जहाँ से निकली राहे-वफ़ा पे चलकर ज़ुर्म-ए गुमाँ से निकली ** मैंने उसे सम्हाला वो…
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