साहित्य
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धुँधली तुम भी, मैं भी
आधुनिकता के इस दौर में बिकती है किताबें फुटपाथ पर, करते हैं लोग मोलभाव, और फिर छोड़ जाते हैं, इन्हें…
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गणित दिवस
रिश्तों के गणित को सुलझा रही हूं। कभी गुणा तो कभी भाग कर रही हूं। जो कदर ना करे मेरी…
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चिराग
जिससे रोशन आत्मा मेरी मैं वो चिराग बुझा बैठा हर अंधेरा मिटाया जिसने मैं वो चिराग मिटा बैठा जो करता…
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दिव्य गंगा सेवा मिशन
दिव्य गंगा सेवा मिशन 🌊🌊🌊🌊🌊🌠🌊 गंगा केवल जलधारा नहीं, संस्कार है, इसके कण-कण में बसता हमारा विचार है। हरिद्वार की…
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हाय रे दुविधा! (सिर्फ एक पीस)
मैं ज्योति कुमारी, आज आपके लिए लेकर आई हूँ हर महिला के दिल की वो ‘खूबसूरत दुविधा’, जो एक साड़ी…
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वह लड़की, याद आती है भाग 6
वह लड़की, याद आती है शांत, सौम्य, गहन गम्भीर अद्भुत सुंदर, जैसे सुन्दरता की पर्याय हो, जैसे किसी देवी शक्ति…
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चायअब बस नाम नहीं बन गई जान है हमारी
** चाय अब बस नाम नहीं बन गई जान है हमारी। तुरन्त स्फूर्ति की बन गई जैसे एक पहचान है…
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चंद्रगुप्त प्रसाद वर्मा ‘अकिंचन’ जी के नाम पत्र
आदरणीय श्री चंद्रगुप्त प्रसाद वर्मा ‘अकिंचन’ जी के नाम पत्र सादर प्रणाम। भोजपुरी भाषा, लोकसंस्कृति और नाट्य परंपरा के जिस…
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ओस बूँद
रात ओस बूॅंद गिरी ऐसी। लगती नाजुक मोती जैसी। पारदर्शी श्वेद हैं जलकण – भोर में मनमोहती कैसी। मिट्टी की…
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