साहित्य
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लघुकथा- इति श्री
“विवाह संपन्न हुआ। आज से आप दोनों एक-दूसरे के जीवनसाथी हुए।”पंडितजी फेरों के मंडप से उठते हुए बोले। “यह लीजिए…
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उपभोक्ता! तुम जागरूक बनो!
उपभोक्ता! तुम जागरूक बनो! अपने अधिकारों को जानो! उत्पादों की खरीद से पहले गुणवत्ता की गारंटी परखो! जागरूक बनो! जागरूक…
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शहर भर ग़म
गाॅंव भर खुशियाॅं । शहर भर ग़म । मुस्कानों का – खीसा ख़ाली । नीर भरी – नैनों की थाली…
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माँ
माँ ( 1) यदि, मेरा ईश्वर से, साक्षात्कार होता तो, माँ, मैं तेरे लिए अमरत्व माँगता और स्वयं के लिए,…
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क्यों होता है,क्या यही प्यार है
छोड़ दी जाएंगी बहुत सी ख्वाहिशें, जिनके पंख तो है पर उड़ान नहीं है। हौसलों में जान तो है, पर…
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गधे की मस्ती.. (बाल–कहानी)
एक जंगल के पास एक छोटा सा गधा रहता था। नाम था उसका गुड्डू। बचपन में गुड्डू खूब मस्ती करता।…
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वह पड़े नहीं, ईश्वर का अहसास है
सालों से हर दिन वह पड़े ही है जो मेरे हर सुख और दुःख का साक्षी है जीवन पूंजी,जीवन सृजन…
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कसक
कसक है अधूरी मिलन की पिया से, न जाने कि कब पूर्ण यह चाह होगी, प्रतीक्षा में गुजरीं कई यामिनी हैं,…
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डॉ भगवान प्रसाद उपाध्याय की दो बाल कविताएं
पक्षी भी शिक्षा देते है तितली से हम सीखें उड़ना भंवरों से नित मंडराना कोयल से हम सीखें गाना तोते…
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