साहित्य
-
हो गया सब कुछ होते होते
हो गया सब कुछ होते होते खो गई निंदिया खोते खोते चुप नहीं कराने वाला कोई चुप हो जा रे……
Read More » -
झूठे के घर लगी है मेला
झुठे के घर पे लगी है खुशी की मेला सत्य घर पे बैठा है मौन बन अकेला ये कैसा दिन…
Read More » -
गज़ल
********************************** जब हम उठते हैं तुम्हारा ध्यान करते हैं। बातो पर तेरी सदा अभिमान करते हैं।। मेरे दिल में धड़कता…
Read More » -
नज़्म – गुरूर
ऐ बंदे आख़िर गुरूर किस बात का है, धर्म का,नस्ल का या कि जात का है? मिट्टी से बना है…
Read More » -
-
धर्मराज युधिष्ठिर का अर्ध सत्य………….
गंगा पुत्र भीष्म ने जब कुरुक्षेत्र की भूमि पर,, कुंती पुत्र अर्जुन के बाणों से, घायल होकर,, बाणों की सैया…
Read More » -
मां, पुण्यतिथि
मां, पुण्यतिथि,,,, मां तेरी यादों को समेटे जिंदा हूं और तेरे साथ सदा ही महसूस करता हूं जानता हूं मां…
Read More » -
धूप
अब धूप मेरे घर तक नहीं आती ये ऊँची अट्टालिकाएँ और प्रदूषण राह रोक लेती हैं सोचती हूँ दूर कहीं…
Read More » -
उदाहरण पेश करके नहीं उदाहरण बन कर दिखाओ
****** उदाहरण पेश कर नहीं उदाहरण बन कर दिखाओ। चुनौती के सामने तुम अपना सीना तन कर दिखाओ।। ****** मत…
Read More » -
बस धीरज का छोर न छूटे
मुखड़ा आँधी आए, तूफ़ाँ टूटे, राह भले ही कठिन बहुत हो। टूटे सपने, छूटें अपने, बस धीरज का छोर…
Read More »