साहित्य
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हम दूब हैं
हम कोई ऊंची अट्टालिका नहीं, हम दूब हैं। जमीं को पकड़े हुए अपनी जड़ों से – गहराई तक जकड़े हुए…
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बिटिया क आचरन(कुण्डली)
बिटिया केहु से मिलहु जब,कर आदर प्रेम सन बात। चन्दा बिन सिंगार के, सगरो शीतल प्रभा दिखलात।। शीतल प्रभा दिखलात…
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हर किसीका दिल जीतना सबसे बड़ी जीत होती है
** हर किसीका दिल जीतना सबसे बड़ी जीत होती है। जब दिल से दिल मिला हो वही सच्ची प्रीत होती…
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मत हो अधीर -प्रिये
मत हो इतना अधीर प्रिये जरा…, साँझ को ढ़ल जाने तो दो निशा जो आ रही -प्रिये उसे भी जवाँ…
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जाड़े की रात
होती नहीं, बराबर सब की– ये जाड़े की रात सिहरती सिहरती सी। है दोरंगी दुनियाँ की क्यों अलग-अलग तस्वीर सी…
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दुनियादारी की पाठशाला
*ज्ञान* ने सिखाया — कैसे उड़ान भरनी है, कैसे शब्दों में अर्थ गढ़ना है, कैसे सिद्धांतों की सीढ़ियाँ चढ़नी हैं।…
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सर्दी
सूरज जब छिपने को जाए तब तो सर्दी खाने को आए देखो इसमें ताकत कितनी बिस्तर में भी रोब जमाए…
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पर जो नवयुग लायें जग में
नींद भले ही, लेलो मेरी नहीं शिकायत, कभी करूंगा लेकिन मुझको बने सहारा उन सपनों को, कभी न दूंगा सपनों…
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फसाने से आदमी
फसाने से आदमी ज़्यादा यहां बीमार मिलता है मुहब्बत में सनम जाने लगा दिलदार मिलता है।। जमाने में ख़ुदा मेरा…
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