साहित्य
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पिता दिवस पर सादर समर्पित
पिता दिवस पर सादर श्रद्धांजलि, माता पिता को आज समर्पित हैं, श्रद्धासुमन अर्पण सब परिवार के हैं, आपके आशीष से…
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ग़ज़ल: थोड़ा तो ठहर जाते
ग़ज़ल: थोड़ा तो ठहर जाते मतला ज़माने को सुनाने से पहले थोड़ा तो ठहर जाते, मुझे यूँ आज़माने से पहले…
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ज़िन्दगी के रंग
ज़िन्दगी है रंगों का खजाना, न कहीं जाना न कहीं आना। उलट-पुलट कर जब चाहो, खोलते रहो ज़िन्दगी की किताब,…
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मिट्टी का दीया है जीवन
मिट्टी का दीया है जीवन ज्योति-सम विकिरण करें महल रेत का नश्वर जीवन इसका नहीं भरोसा कभी खुशी तो…
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स्त्री सिर्फ सवाल क्यों
स्त्री क्यों हर पल सवालों के घेरे में रहती है? क्यों सारी पीड़ाओं को वह अकेले ही सहती है? घर…
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अतीत से अब तक … फीफा विश्वकप फुटबॉल…
मेजबान पर स्वर्ण फिर मेहरबान … ~~~~~~~~ विश्व फुटबॉल के मानचित्र पर देशो की बढ़ती संख्या और लोकप्रियता ने फीफा…
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बनमाली वर्णिक छंद में हे विश्वेश
संसार में , तुम सोहे, निरांतक। नागेंद्र हे, पट धारे , मृगांतक।। धारे गला , अहिमाला , विशृंखल। विश्वेश हे,…
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जागो युवाओं जागो
#उठो जवानों समय पुकारे सपनों को नव आकार दो अपने श्रम और साहस से तुम भारत को नव उपहार दो।…
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ग़ज़ल
करने लगा है क्या-क्या अब काम ये ज़माना। सुनते हैं राम जी का खाली हुआ ख़ज़ाना।। ईमान की परीक्षा…
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दास्तान
दो दिलों की दास्तान एक मैं एक तू!! ढूंढ रहे हैं इन्सान एक मैं एक तू!! तुम्हारा फ़र्ज़ फ़र्ज़ है…
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