साहित्य

स्त्री सिर्फ सवाल क्यों

सौ, भावना मोहन

स्त्री क्यों हर पल सवालों के घेरे में रहती है?

क्यों सारी पीड़ाओं को वह अकेले ही सहती है?

घर परिवार में जन्म लेते ही ठुकराई जाती है,

जबकि सारी ममता उसी के दिल में पाई जाती है।

 

अपने ही घर में बेटा बेटी में भेद किया जाता है,

बेटे को हर पल आजाद और उसे कैद किया जाता है।

जीवन भर वो क्यों हर कसौटी पर रखी जाती है?

कभी जहर तो कभी अग्नि पर क्यों परखी जाती है?

 

क्यों वह अपने अरमानों के पंखों से उड़ान नहीं भर सकती?

क्यों वह अपनी मर्जी से अपना जीवन जी नहीं सकती?

कहां गई थी क्यों गई थी हर पल सवालों के घेरे में रहती है,

क्यों नारी इतनी बेज्जती को चुपचाप सहती है?

 

सपनों और चाहतों को छोड़ घर की धूरी बनकर रहती है,

ममता की मूरत शक्ति सृजन है फिर भी अस्तित्व ढूंढती रहती है।

समाज अपनी सोच बदले और नारी को सम्मान दे,

सवालों को छोड़कर अब उसे उसके हिस्से का आसमान दे।

 

सौ, भावना मोहन विधानी ✍️

अमरावती महाराष्ट्र।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!