साहित्य
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मजदूर दिवस
मजदूर प्रचंड गर्मी में ठिठूरती सर्दी में तेज बरसात में खुले आसमान के नीचे करता है मजदूरी। कठिन परिश्रम भूल…
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मजदूर दिवस विशेष
मेहनत और लगन से, करता अपना काम । तब जाकर पाता कहीं, थोड़े से वह दाम ।। गुजर-बसर है कर…
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हम मजदूर हैं, मजबूर नहीं
मेहनत करते,पसीना बहाते पर हम स्वाभिमान से रहते रूखा सूखा खाकर पेट भरते कभी बेबस व दीनहीन न बनते ऊँची-…
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बढ़ती गर्मी से त्राहि-त्राहि
बढ़ती गर्मी से त्राहि-त्राहि विकट है गर्मी कुछ रहा ना सुझाई। पसीनो से तरबतर हो रहे। खाना बनाने का मन…
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मजदूर
इस जहाँ की हर लौकिक रचना को रचनेवाले हैं मजदूर, मेहनतकश और कर्तव्यनिष्ठा की सीधी-सादी पहचान है मजदूर। गाँव में…
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मज़दूर दिवस
हाथों में छाले, माथे पर पसीना, फिर भी चेहरे पर न शिकवा, न शिकन। ईंट-गारे से जो महल बनाते हैं,…
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श्रमिक दिवस
भूखा प्यासा नित श्रमिक, निशि-दिन करे प्रयास। कठिन परिश्रम भूल सब, रखकर मन विश्वास ।। सुबह-सुबह उठ देख रवि, लेता…
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श्रमिक दिवस
मुट्ठी में सूरज लेकर चलता, पांवों में छाले भी खिलते हैं, वो श्रमिक है—जो पत्थरों में अपने सपनों के घर…
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शत शत नमन हर श्रमिक कामगार को
1// मेहनत से ही तो आज खड़े ये सब बंगलें कोठी मकान हैं। किसान ही तो उपजाते ये सब खेत…
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मजदूर दिवस पर विशेष
हाड़ तोड़ मेहनत सब करते। दाम नहीं उनके जब मिलते।। बच्चें भूखे सो जाते है। दुखड़ा कभी न कह पाते…
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