
माँ मूर्ति ममता की लगे, पाले हमें निष्काम।
जब अंक में भींचे मुझे, पाया सुखद विश्राम।।
करती जरूरत पूर्ण सब, हरपल रखे वह ध्यान।
शिक्षा अलौकिक दे हमें, जीवन बने आसान।।
अनमोल जीवन ये दिया, करती सदा आभार।
गलती सुधारे नित सकल, वह दे हमेशा प्यार।।
आँचल छिपाकर बाल को, दे श्रेष्ठ नित संस्कार।
जब भी परेशानी पड़े, देती सलाहें चार।।
ईश्वर स्वयं आते धरा, धर मातु का वह रूप।
सुख के अनूठी छाँव दें, पड़ने नहीं दें धूप।।
माँ कामना रखती हृदय, नित बाल के उत्कर्ष।
मिलती सफलता वत्स को, अत्यंत होता हर्ष।।
देती दुआएँ वो सदा, उत्थान हो अब बाल।
होती परिस्थिति जब विषम, बन के खड़ी हो ढाल।।
रचना गढ़ी अद्भुत प्रभो, जग में बनायी मात।
मस्तक झुके आभार से, दी है हमें सौगात।।
✍️हेमा जालान’कनक’ मुंगेर 🙏🏼




