कविता
गीता के सात सौ श्लोक
जीने की कला सिखाते हैं
निष्काम कर्म करते रहो कह
कर्मपथ पर सबको चलाते हैं
गीता ग्रंथ मानव धर्मशास्त्र है
यह वेद पुराणों का सार है
भगवान के श्रीमुख की वाणी है
ये उपदेश अध्यात्म का भंडार है
निराश व्यक्ति को आशा बंधाती
आत्मा को परमात्मा से मिलाती
सहज सरल भाषा मे लिखी हुई
गीता ईश्वर पथ की राह दिखाती
धर्म के साथ खड़े रहे पांडव संग
सारथी बन बढ़ते रहे श्रीकृष्ण
सजातीय प्रवृतियों की जीत हुई
अधर्म असत्य की युद्ध में हार हुई
कर्मयोग भक्तियोग सांख्य योग
सब गीता में स्पष्ट कर दिया है
ईश्वर से मिलने का श्रीकृष्ण ने
फिर मार्ग प्रशस्त कर दिया है
-डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित
कवि,साहित्यकार
भवानीमंडी
जिला झालावाड़
राजस्थान



