साहित्य

कभी दिल में

कनक

कभी दिल में मेरे भी तो आइएगा
उजाले में आकर के फ़िर बहलाएगा।।

बताना हमें कुछ भी दिल से फसाना
मुझे भी जताना वो फरमाइएगा।।

जमाने से डरता नहीं हूं अब तलक
जमीं आसमां पर हमें समझाएगा।।

सितारे गगन में हैं ये तारे जगमगा
इश्क़ में भी खालिश है तड़फाइएगा।।

जवानी में इतना न इतराइएगा
मगर दिल से अपने न पछताइएगा।।

फसाने बहुत हैं यहां दिल के यारों
खनक दिल बसाना यहां आइएगा।।

हमारे भी घर पे कभी तुम सुनाना
बिना इश्क़ घर में नहीं आइएगा।।

कनक

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