साहित्य

पेड़ की छांव,,🌳🌴

सौ, भावना मोहन

पैदल चलते-चलते जब थक जाते है पांव,

मन को सुकून दे जाती है पेड़ की ठंडी छांव।

यह हरे भरे पेड़ लगते हैं जैसे मां का आंचल,

थके हारे पथिक को देते हैं सुकून के पल।

 

तेज तपती गर्मी में जब हो जाता है हाल बेहाल,

पेड़ की ठंडी छाया में बैठकर मन हो जाता निहाल।

तेज तपती गर्मी में मजदूर पेड़ की छाया में सो जाते हैं,

मनुष्य पक्षी जानवर भी असीम सुख पाते हैं।

 

यह पेड़ अपनी छाया से धरती को तपने से बचाते हैं,

मनुष्य पक्षी और जानवर सब इसमें आश्रय पाते हैं।

बच्चा बूढ़ा जवान सब पेड़ की छाया में सुख पाते हैं,

पल दो पल के लिए पेड़ की छाया में सो जाते हैं।

 

सौ, भावना मोहन विधानी ✍🏻❤️

अमरावती महाराष्ट्र।

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