साहित्य

अमर शहीद पंजाब केसरी लाला लाजपतराय — ओज-स्तुति

दिनेश चन्द्र गुरुगरिया 'द्विज'

संदर्भ – २८ जनवरी, जन्म दिवस

पंजाब-भूमि की गोद भरी जब, तेज-तरंग से अंकुर फूटा,
मोगा में अटरंग प्रात की बेला, राष्ट्र-धर्म का दीप जगा।
लाजपतराय नाम हुआ तब, ज्यों तारा नभ में ज्योतित हो,
बाल दिवस या वृद्ध दिवस में, भारत मन का स्पंदन हो।।

लेखनी, कर्म, वाणी, नीति, सब एक पुरुष में तान दिए,
शिक्षा-आर्य वि.विद्यालयों के द्वार सदैव खुले किए।
सामाजिक अंधकार छंटा जब, उन्होंने दीपक फूंक दिया,
बाल-पाल-लाल ने मंत्र जपा, पराधीनता का नाश किया।

“साइमन गो बैक!” नाद उठा तो, मिंटो-मॉरल चिंता में पड़े,
सड़कों पर इक रण बज जाता, लहरें निर्भयता से चढ़े।
लाठी-वारों की चोटें ढहकर, शरीर भले दुख में डूबा,
पर हृदय विजयमाला पहने, आत्म-प्राण का दीप झूमा।।

पंजाब केसरी वह कहलाए, सिंह हृदय से गर्जन करते,
अधिकार और संस्कृति रक्षा, दोनों ही सच का धर्म भरते।
देश की आर्थिक रीढ़ सुधारें, श्रम और पूँजी के संग जोड़ें,
विदेशी चक्रों की साँकल तोड़ें, स्वदेशी साधन दिन-रात जोड़ें।।

आज के भारत में भी उनका, पथ प्रखर और बोध अमर,
त्याग-तपस्या-धर्म-दान की, ज्योति अनश्वर, शौर्य प्रखर।
२८ जनवरी के इस अवसर पर, उनके चरण प्रणामित खड़े
भारत माता के बलिदानी, काल-अकाल में अडिग बढ़े ।।

✍️
दिनेश चन्द्र गुरुगरिया ‘द्विज’
पीसांगन अजयमेरू राजस्थान

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