
गणतंत्र दिवस
गणतंत्र दिवस आया देखो
स्वतंत्र देश के नए संविधान
का गठन कर डॉ भीमराव
अम्बेडर ने बिगुल बजाया है।
राष्ट्रीय पर्व हर्षा उल्लास से
मनाया है तिरंगा झंडा फहराया है
देश का गौरव मान बढ़ाया है।
नए संविधान का परचम लहराया है।
आजादी के नायक कैसे होते
तलवार की धार जैसे होते
शौर्य बल ताक़त शूरवीरो की है
निशानी जो भी देश को पहुंचाये
हानि हो जाये मिट्टी का ढेर ।
वीर शहीदो की गाथाये सुनकर
बाल मन गाए ये देश की मिट्टी है
सोना इसकी रक्षा के लिये सदैव
तत्पर रहना बलशाली नौजवाँ
का एक ही नारा हिंदुस्तान हमारा
खाना पीना चैन सकूं सब खो जाता
नीन्द का तक़िया बॉडर हो जाता है
खुशी-खुशी शूरवीर का घर सरहद
हो जाता है
बड़ा मुश्किल है ये सब कर पाना
अपने परिवार की मोह-माया को
त्याग कर सरहद पार सो जाना
भारत माता की मिट्टी का कर्ज
चुकाना है।
डॉ संजीदा खानम शाहीन जोधपुर



