साहित्य

खुशियों के नव फूल खिले

लालबहादुर चौरसिया 'लाल'

खुशियों के नव फूल खिले,
उतरे हरियाली आँगन में।
*नए साल की नवल प्रभा,*
*आलोक जगा दे जीवन में।।*
छल दंभ द्वेष को त्यागे मन,
उत्थान सतत यूं बना रहे,
सम्मान सदा सम्मान मिले,
सत कर्मों में मन सना रहे,
इंद्रधनुष के रंग सजीले,
छा जाए इस तन मन में।
*नए साल की नवल प्रभा,*
*आलोक जगा दे जीवन में।।*
नंदनवन से निकल के खुशबू,
जीवन को महकाती जाए,
नए नए परिधान पहनकर,
नई बहारें आती जाए,
झंकृत हो जीवन की बंसी,
उम्मीदों के मधुबन में।
*नए साल की नवल प्रभा,*
*आलोक जगा दे जीवन में।।*
स्वप्न सुहाने पूर्ण प्राप्त हो,
गौरव व सम्मान मिले,
प्यार मिले संस्कार मिले,
नित मृदुता नई उड़ान मिले,
भावों के यूँ सहज पथिक बन,
छा जाओ हर उपवन में।
*नए साल की नवल प्रभा,*
*आलोक जगा दे जीवन में।।*
-लालबहादुर चौरसिया ‘लाल’
गोपालगंज आजमगढ़
9452088890

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