जब राम के बाल रूप को देखकर भगवान शिव हुए मोहित और पहुंच गए दर्शन करने अयोध्या

अहरौला। मेहियापार काजीपट्टी मे चल रहे सात दिवसीय आनन्द मयी राम कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन राम जन्म के सुंदर वर्णन को सुनकर श्रोता भाव विभोर हो गए और जय श्री राम के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा इसी क्रम में कथा वाचक पंडित कौशल किशोर ने कहा प्रभु श्री राम के जन्म को सुनकर और उनके बाल लीलाओं से मोहित होकर भगवान शिव भी अयोध्या में उनके दर्शन के लिए पहुंच जाते हैं कथावाचन करते हुए पंडित कौशल किशोर महाराज ने राम जन्म का सुंदर वर्णन किया कहा कि अयोध्या मे राम जन्म हुआ है तो अयोध्या मे ऐसा उत्सव हुआ कि बाबा तुलसीदास ने रामचरित मानस मे लिखा कि एक महीने मानो रात हुई ही नही अपने रथ के साथ सूर्य देव भी थक गये भगवान शिव भी बाल लीला और प्रभू श्रीराम का दर्शन करने पहुंच गये दुर से भोलेनाथ ने प्रभू को मन ही मन प्रणाम किया और माता कौशल्या से दर्शन की इच्छा जताई तो कौशल्या साधू वेष को देखकर बालक को दिखाने से मना कर दिया बाबा ने कहा हम यही बैठेंगे दर्शन करने के बाद ही जायेगे प्रभू श्रीराम ने शिव के हठ योग को समझ लिया और रोने लगे। कहां की तपस्वी का बल क्षमाशीलता में छिपा होता है इस तरह से बालक का बल रोने में होता है नारी का बाल पतिव्रता में होता है कहां की भगवान ने ब्राह्मण, गाय, देवता, संत की रक्षा के लिए पृथ्वी पर अयोध्या में महाराज दशरथ के पुत्र के रूप में अ अवतरित हुए भगवान अपने सच्चे भक्तों के लिए नंगे पैर दौड़कर रक्षा करते हैं जैसे उन्होंने द्रोपती की दुशासन से रक्षा की ग्राह से गज को बचाया सिर्फ सच्ची भक्ति से प्रभु मिलते हैं और वह कण कण में व्याप्त हैं। सत्य से बड़ा कोई धर्म नहीं और झूठ से बड़ा कोई पाप नहीं है।

