साहित्य

फिर प्यार करते हैं

सुमन बिष्ट

चलो अपने से फिर प्यार करते हैं,
इस बार खुद से इकरार करते हैं।
बीते बरसों की थकन उतार कर,
अपने पर थोड़ा एतबार करते हैं।

चलो अपने से फिर प्यार करते हैं,
झुर्रियों को तजुर्बे की निशानी मानते हैं।
जो पीछे छूटा, उस पर मलाल नहीं,
जो मिला, उसका एहसान मानते हैं।

चलो अपने से फिर प्यार करते हैं,
आईने से नज़रें अब भी चुराते नहीं।
जो हैं जैसे हैं, वैसे ही,हमेशा रहेंगे
हम खुद को कभी कम बताते नहीं।

चलो अपने से फिर प्यार करते हैं,
सेहत को अच्छी आदतों में ढालते हैं।
हँसी, सैर, सुकून के पल, दोस्तों संग
अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाते हैं।

चलो अपने से फिर प्यार करते हैं,
कुछ नया सीखने से अब डरते नहीं।
नई राह, नये शौक और नयी जगह
उम्र के बहाने बना अब टालते नहीं।

चलो अपने से फिर प्यार करते हैं,
आत्मसम्मान को आधार बनाते हैं।
इस परिपक्व, बेमिसाल उम्र में भी,
खुद से किया हर वादा निभाते हैं।

चलो अपने से फिर प्यार करते हैं।

सुमन बिष्ट, नोएडा

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