साहित्य

फरवरी

सुषमा दीक्षित शुक्ला

इश्क के नगमे गाती है ये फरवरी ।
दिल से दिल को मिलाती है ये फरवरी ।
हुस्न के रंग सजाती है ये फरवरी।
इश्क के नगमे गाती है ये फरवरी ।

माह फागुन में है सब दिखे प्यार में ।
इक खुमारी सी छाई है दीदार में ।
गुल तो खिलते ही रहते हैं संसार मे।

प्यार के गुल खिलाती है ये फरवरी ।
इश्क के नगमे गाती है ये फरवरी ।
दिल से दिल को मिलाती है ये फरवरी ।
हुस्न के रंग सजाती है ये फरवरी

महफिले है सजी शमा परवानो की ।
लिख रही दस्ताने हैं दीवानों की ।
प्यार की बाते है दिल के अफसानों की ।

मन की महफ़िल सजाती है ये फरवरी ।
इश्क के नगमे गाती है ये फरवरी ।
दिल से दिल को मिलाती है ये फरवरी ।
हुस्न के रंग सजाती है ये फरवरी ।

हैं गुलाबो की डाले महकने लगी ।
ये नशीली फिजायें बहकने लगीं ।
अब तो आमो पे कोयल चहकने लगी ।

साल भर बाद आती है क्यूँ फरवरी ।
जवां धड़कन जगाती है ये फरवरी ।
इश्क में नगमे गाती है ये फरवरी ।
दिल से दिल को मिलाती है ये फरवरी ।
हुस्न के रंग सजाती है ये फरवरी ।

सुषमा दीक्षित शुक्ला

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