
आज सुन गा रही कृष्ण की बांसुरी,
.मादक बना रही कृष्ण की बांसुरी।
काम छोड़ निकल पड़ी सभी नारियां,
प्यार बरसा रही कृष्ण की बांसुरी।
हिलमिल भिगो रहे चुनरिया साथियां,
देख इतरा रही कृष्ण की बांसुरी।
मौज है श्याम तेरी दिवानी जया,
मंद सुर भा रही कृष्ण की बांसुरी।
सुमन के मन बसी बांसुरी कृष्ण की ,
प्रेम सिखला रही कृष्ण की बांसुरी।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




