
गौरवपूर्ण इतिहास रचा बीरों ने,भारत को आजाद कराया,
अद्भुत रण कौशल दिखलाकर,देश का अपने मान बढ़ाया,
लहराकर लाल तिरंगा ड्योढ़ी पर, स्वाभिमान सदा ऊंचा रखा
बीर बांकुरों की गाथा में,मस्तक सबने सदा झुकाया।।
निर्भीक निडर थे सभी सिपाही,जिनके शोणित से रंगी धरा है,
नर्म दिलों के रण मुखिया थे,आजाद,भगत से भरी धरा है,
अनगिनत बीर सैनिक बलि की,साक्षी बनी भारत माता,
पौरुष और बाहु बल के इनकी,ऋणी सदा रही धरा है।।
मराठा साम्राज्य के संस्थापक, छत्रपति शिवाजी महराज हमारे
सोलह वर्ष की किशोरावस्था में,तोरणा किले पर दुश्मन संहारे
शौर्य का परिचय दिया उसी दिन,पूत पांव पालने में दिख गये
गौरिल्ला युद्ध के जनक शिवाजी,कितनी ही कड़ाईयों के साथी प्यारे।।
सूरत पर धावा बोलकर इनने, मुगलों को कड़ी चुनौती दी,
कूटनीति का परिचय मिलता, औरंगजेब कैद से मुक्ती ली
तटरक्षा हेतु इन्होंने ही,नौ सेना का शव निर्माण किया,
हिंदवी स्वराज स्थापना हेतु, धर्मपरायणता सहिष्णु बन नींव रखी।।
महाकवि भूषण के शब्दों में,,,
राखी हिंदुवानी हिंदुवान का तिलक राख्यौ,
अस्मृति पुरान राखे,वेद धुनि सुनी मैं
राखी राजपूती राजधानी राखी राजन की
धरा में धरम राख्यौ ज्ञान गुन खुशी मैं
भूषन सुकवि जीति हद्द मरहट्टन की
देस देस कीरत बखानी सब सुनी मैं
साहि के सपूत शिवराज शमशीर तेरी
दिल्ली दल दावि के दिवाल राखी दुनी।।
अवधेश कुमार श्रीवास्तव




