साहित्य

पन्नों में बसती एक सजीव दुनिया

विश्व पुस्तक दिवस : 23 अप्रैल

किताबें चुप रहती हैं, पर बहुत कुछ कह जाती हैं,
बिना आवाज़ के ही मन को छूकर बहलाती हैं।

बीते हुए लम्हों की खुशबू इनमें बस जाती है,
हर पन्ने पर एक नई दुनिया मुस्कुराती है।

जब भी अकेलापन दिल को घेरने लगता है,
कोई शब्द सहारा बनकर साथ निभाता है।

कभी हँसी के रंग, कभी आँसुओं की छाया,
किताबों ने हर एहसास को दिल से अपनाया।

इनमें छुपे हैं अनुभव, संघर्ष और उजाले,
जीवन के रास्तों को ये चुपचाप सँभाले।

ना कोई शोर, ना कोई दिखावा इनमें,
बस सादगी से भरी सच्चाई है हर एक में।

जो इनसे दोस्ती कर ले, वो कभी तनहा नहीं होता,
हर पन्ना उसके साथ खड़ा, हर पल में होता।

किताबें केवल शब्द नहीं, जीवन का आईना हैं,
जो इन्हें समझ ले, वही सच्चा जीना जानता है।
~जीतेन्द्र गिरि गोस्वामी “जीत” छत्तीसगढ़

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!