साहित्य

अकेलापन

पंकज एस पाण्डेय

अच्छा लगता है,
महीने के अंतिम दिनों में अकेले बैठकर,
अपने बीते हुए पलों को याद करना …

कभी-कभी बीते पल भी सबसे ज़्यादा सुकून देते हैं,
यादों में खो जाना भी एक तरह की शांति है …

कुछ पल…
बस दिल में ही अच्छे लगते हैं …

अच्छा लगता है,
जब ज़िंदगी थोड़ी देर के लिए,
पीछे मुड़कर देखती है …

यादें भी क्या कमाल की होती हैं,
दर्द भी देती हैं और सुकून भी ..

अच्छा लगता है कुछ पल
अकेले बैठकर !!!
*** ****
✍🏼पंकज एस पाण्डेय, कन्नौज!
स्वरचित,

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