
पृथ्वी -दिवस पर प्रकाशन हेतु एक श्रेष्ठ रचना
देखो देखो…..
कैसे जल रही है -धरती
और जल रहा –आकाश
हो गया लाल -सारा जहां
जल रहे हैं जीव-जन्तु धरा पर
देखो देखो….
कट रहें है पेड़ हरे-हरे
और -उजड़ रहे हैं – बन
रही हैं अट्टालिकाएं वहां
देखो देखो….
कैसे सूख रही है -धरती
बिन पानी के-और हवा भी
आओ -चलें -रोकें…
कटने से हरे-हरे पेड़ों को
और उजड़ने से वन को
तभी बचेंगे..
धरती जल और आकाश ||
शशि कांत श्रीवास्तव
डेराबस्सी मोहाली -पंजाब
स्वरचित मौलिक रचन
21-04-2026



