साहित्य

कविता

वाई.वेद प्रकाश

जीवन की फूल बगिया को
हमने बहुत सजाया है
अनगिन वृक्ष लगाकर हमने
पर्यावरण बचाया है।
वृक्षों की महिमा है न्यारी
गीतों में हमने गया है ।
रंग-बिरंगे फूलों फलों से
हमने आंगन महकाया है।
हरे भरे सुंदर उपवन को
देख-देख मन हर्षाया है।
पुरखों के रोपें बिरवों से
मिले सुखद शीतल छाया है।
पेड़ कटे तो बचे न कुछ भी
धरती का तन गरमाया है।
फैल रहा हर और प्रदूषण
मानव कर्मों का फल पाया है
बचे जिंदगी बचे मनुजता
कुछ विचार मन में आया है।
लेकर के संकल्प सभी ने
पर्यावरण बचाया है।
इस धरती को हरा- भरा कर
हमने पुण्य कमाया है।
तापमान जब बढ़ा धरा का
व्याकुल जन मन को पाया है।
आओ मिलकर आगे आओ
धरती मां के प्राण बचाओ।

वाई.वेद प्रकाश
द्वारा विद्या रमण फाउंडेशन
शंकर नगर, मुराई बाग, डलमऊ, रायबरेली उत्तर प्रदेश 229207
9670040890

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