
गुण तुम्हारा गाऊँ माँ
आठों याम अविराम
कृपा से तेरी देखी दुनिया
देखा सुखमय धाम.. गुण।
आँचल की प्यारी छाया
धन अतुल्य तुमसे पाया
ममता की तू मूरत प्यारी
रही साथ बनकर छाया
नहीं और कोई तुम सा माँ
तू जननी सारा जहान
स्वीकारो माँ चरण वन्दन
स्वीकारो प्रणाम… गुण।
जाग जाग तू हमें सुलाती
हर हालात में गले लगाती
प्यार तुम्हारा निश्छल निर्मल
नहीं कभी माँ तू अघाती
स्थिति चाहे जो भी जैसी
पूरी करती आस
तेरी त्याग तपस्या का माँ
चुकाऊँ कैसे दाम.. गुण।
(गोवर्धनसिंह फ़ौदार ‘सच्चिदानन्द’)
पता :मोरिश्यस।



