साहित्य

नशा ना करना तुम देखो ….

सुन्दर लाल मेहरानियाँ

नशा ना करना तुम देखो,सब कहते बड़ी बीमारी हैl
जिसने किया नशा इस जग में,हसीँ जिंदगी हारी है।।

गिरवी रख दिया हसीं आशियाँ,खेत क्यार भी छोड़े ना।
एक अभागिन रोज सिसकती, फिर भी बंधन तोड़े ना।।
बेच दिए गहने सारे,मंगलसूत्र की बारी है।
नशा ना करना तुम देखो,सब कहते बड़ी बीमारी है।।

हसीं आशियाँ बिखर गया,हसरत होती मर जाने को।
प़डा बेवङा बीच सड़क पर,ठोकर मिलती खाने को।।
पर लब की प्यास बुझाने को,बोतल की फिर तैयारी है।
नशा ना करना तुम देखो ,सब कहते बड़ी बीमारी हैl।।

देख जवानी बेटी की ये ऐसी जगी हवस मन में।
शर्मो- हया त्याग दी सारी,आग लगी कैसी तन में।
लगा दाग दिया अपने खून पे,बन बैठा व्यभिचारी है।
नशा ना करना तुम देखो,सब कहते बड़ी बीमारी हैl

लुटा दिया दारु में हर सब,बना भिखारी है बैठा।
तलब लगी पीने की,ना अब जेब में कोई है पैसा।
भल मानुष है कैसा,इसकी अकल गई सब मारी है।
नशा ना करना तुम देखो,सब कहते बड़ी बीमारी हैl।

नशा ना करना तुम देखो,सब कहते बड़ी बीमारी हैl
जिसने किया नशा इस जग में, हसीँ जिंदगी हारी है।।
✍️सुन्दर लाल मेहरानियाँ

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