साहित्य

सिंदूर का सत्य

राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

मांग में सजा वो लाल उजाला,
सिर्फ रंग नहीं, जीवन का रखवाला।
हर कण में बसी है प्रार्थना गहरी,
सात वचनों की अमर कहानी ठहरी।
सिंदूर नहीं बस सौभाग्य की रेखा,
यह तो प्रेम का अटूट है लेखा।
हर सुबह जब इसे माथे पर सजाती,
नारी अपने सपनों को फिर जगाती।
यह आस्था का दीप जलाता है,
हर दुःख में भी साथ निभाता है।
लाल रंग में छिपा साहस अनोखा,
जो हर मुश्किल में बनता है संजोखा।
सिंदूर की लाली में त्याग समाया,
हर रिश्ते का गहरा साया।
यह केवल श्रृंगार नहीं कहलाता,
नारी का स्वाभिमान बन जाता।
जब-जब ये माथे पर चमकता है,
एक घर का भाग्य दमकता है।
सिंदूर की हर रेखा कहती कहानी,
अटूट प्रेम और अडिग नारी की निशानी।

स्वरचित मौलिक
राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
जगदलपुर राजिम
छत्तीसगढ़

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!