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साहित्य साधक मंच का 224 वां मासिक सारस्वत कार्यक्रम संपन्न जब भी दिल के सच्चे ढूंढे जायेंगे, काँटों वाले रस्ते ढूंढे जायेंगे

द ग्राम टुडे /बेंगलुरु कुँ० प्रवल प्रताप सिंह राणा

बैंगलोर की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था साहित्य साधक मंच का 224 वां मासिक सारस्वत कार्यक्रम वरिष्ठ साहित्यकार श्री नरेंद्र शर्मा खामोश की अध्यक्षता और प्रसिद्द ग़ज़लकार डॉ सुनील पंवार के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में गीत कवयित्री सुधा अहलूवालिया एवं ग़ज़लकारा सुधा दीक्षित की महनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभारम्भ पद्मा श्रीनिवासन वसुधा द्वारा प्रस्तुत माँ शारदे की वंदना से हुआ ततपश्चात काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें कवियों ने गीत, ग़ज़ल, दोहा और छंदों की ऐसी गंगा बहाई कि श्रोता मंत्रमुग्ध होकर घंटों डुबकी लगाते रहे। नरेंद्र शर्मा ने ‘ यह तो अच्छा है ख़ुदा ही नज़र नहीं आता,वरना इस युग में ख़ुदा का भी ख़ून हो जाता’, डॉ सुनील पंवार ने ‘जब भी दिल के सच्चे ढूंढे जायेंगे, काँटों वाले रस्ते ढूंढे जायेंगे, सुधा अहलुवालिया ने ‘युद्ध का पर्याय जीवन हो गया है, दर्द में आघात का व्रण बो गया है ‘ सुधा दीक्षित ने ‘मैं तो ख़िज़ाँ की ज़द में हूँ फ़स्ले बहारां अब नहीं, कहने को ज़िंदा हूँ मगर कम हो गयी है ज़िन्दगी’, ‘रचना उनियाल ने ‘ शगुन रंग का थाल सजा है, मन सजनी है कोरा। बाँध संगिनी प्रेम मौली से,उर आलय का डोरा’, राहुल मुरके ने “कुछ लोगों की बात नहीं है ऐ राहुल, हम तो सबके दिल पे छाने निकले हैं।” गीता चौबे गूंज ने “कुरेदूँ जख्म मैं तेरे, नहीं फितरत रही मेरी, दिखाऊँ दीप सूरज को, नहीं हिम्मत रही मेरी’ रोहित राज ने ‘तुमने कहा उस शख्स को जीने की तलब है,हमको भी मिला था कभी मौका उसे कहना, अंकित डोकानिया ने ‘एक कस्तूरी की ना-हक खोज में, दिल हिरन अर शहर जंगल हो गया’ , स्वीटी सिंघल सखी ने ‘इसे तन्हाई की लत लग गई है,ये दिल अब भीड़ से घबरा रहा है, भूपेंद्र सिंह ने ‘हार्दिक हर्षाकांक्षाओं को संजो कर कर रहा था यत्न,बनने का कुछ, इस ईर्ष्यत्व के भुवन में, और राधेश्याम यादव सुदर्शन ने ‘थकी, दुःखी, सुमुखी अबला -सी अथक वसुंधरा घूमती,, तटों को सींचती, तिमिर को चीरती कि नव विहान जाग ‘ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। इनके अलावा दीपक पांडे , मंजू वेंकट, उमा नाग,वरुण दीक्षित, ज्ञानचंद मर्मज्ञ, नारायण सिंह, पद्मा श्रीनिवासन, राही राज़, प्रीति राही , सुशील कुमार, आशारानी शरण,पूनम बेलानी ,नमिता सिन्हा,नयना जैन,बापू गौड़ा पाटिल,पहाड़ सिंह,हेमा देसाई ने अपनी रचनओं से श्रोताओं को मन्त्र मुग्ध किया। कार्यक्रम में डॉ रणजीत,प्रोफ़ेसर मैथिलि राव,संजय जोशी,आभा संजय जोशी,अरविन्द अहलूवालिया, स्वाति दीक्षित और शरद सिंह की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन मंच के अध्यक्ष ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने किया।

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