
उम्मीदों को सदा पत्थर जैसा कठोर होना चाहिए..,
पत्थर अगर आस्था है तो कला की प्रतीक भी है,
दिल तो एक पवित्र घर है,
क्योंकि ईश्वर सदा करते हैं वहीं वास ,
शज़र प्रकृति का अनमोल उपहार,
जो बनता है आशियाना परिंदों का,
और देता है सुकून और शीतलता,
दरिया बहती अपनी ही रौ में,
जो कभी ना रूकती सदा ही बहती,
कितनी गहरी है ये दरिया पता नहीं,
पर -बड़े बड़े तूफानों को वो,
सदा छुपा कर मन में रखती,
सहरा है प्रतीक तन्हाई और धैर्य का,
सदा नाज़ रहता है उसे अपनी वीरानी पे,
अपनी खामोशी में वो सदा रखता है,
वर्तमान और भूतकाल की यादों को,
अपनी जिंदगी से थके हारे लोगों को,
धूप भी छाँव बनकर उनका हौसला बढ़ाती है सदा ,
क्योंकि, उम्मीदें सदा पत्थर जैसी कठोर होती हैं,
क्योंकि, उम्मीदें सदा पत्थर जैसी कठोर होती हैं ||
शशि कांत श्रीवास्तव
डेराबस्सी मोहाली, पंजाब
स्वरचित मौलिक रचना
07-04-2026




