साहित्य

शास्त्र सम्मत

नागेंद्र नाथ गुप्ता

बात तर्क – संगत हो

और शास्त्र सम्मत हो,

उपदेश ज्ञान वही दे

उसमें जो पारांगत हो।

ज्ञान का निरूपण हो

वाणी में आकर्षण हो,

शांतचित औ निपुणता

मात्र प्रभु को अर्पण हो।

तार्क पूर्ण सिद्धांत हो

उपनिषद हो, वेदांत हो,

चिंतन, गहराई अधिक

सागर मगर प्रशांत हो।

*नागेंद्र नाथ गुप्ता­, मुंबई*

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