
बात तर्क – संगत हो
और शास्त्र सम्मत हो,
उपदेश ज्ञान वही दे
उसमें जो पारांगत हो।
ज्ञान का निरूपण हो
वाणी में आकर्षण हो,
शांतचित औ निपुणता
मात्र प्रभु को अर्पण हो।
तार्क पूर्ण सिद्धांत हो
उपनिषद हो, वेदांत हो,
चिंतन, गहराई अधिक
सागर मगर प्रशांत हो।
*नागेंद्र नाथ गुप्ता, मुंबई*



