
माँ देवी धर के मंदिर की, पूजा का आधार।
माँ की गोदी जन्नत बसती, सपनों का संसार।।
माँ के दिल में हरित सुधारस, माँ के पाॅंव पखार।
माँ देती आशीष सदा ही,, खुशियाँ जीवन सार।।
माँ की गोद का प्यार पाने, आये धरा त्रिदेव।
माँ की बात मान जंगल में, घूमे है नरदेव।।
मातु- पिता की सेवा करना, देते तुमको प्यार।
चरणों में उनके मिलता है, सारा सुख भंडार।।
मातृ दिवस पर सबसे मेरा, यह है एक सवाल।
माँ को छोड़ा वृद्धाश्रम में, क्यों है मचा बवाल।।
मातु- पिता के ऋण से बेटा, मिलती कहीं न मुक्ति। चाहे जितना जतन करो तुम, मिले न कोई युक्ति।।
माँ ही सबकी जन्म दायनी, विधि ने लिखा विधान।
माँ के ऋण से मुक्त नहीं है, जन्म-जन्म यह मान।।
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डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश




