
30 मई का दिन है आया,
‘उदन्त मार्तण्ड’ याद दिलाया।
पहला पन्ना हिंदी का छपा,
तभी से सच का सूरज उगा।
कलम चली तो राज हिले थे,
अंग्रेज़ों के ताज गिरे थे।
भारतेन्दु से गणेश शंकर तक,
शब्दों ने ही बिगुल बजाया अब तक।
आज भी गाँव-गली में जाती,
हिंदी खबर हर सच बताती।
मोबाइल-टीवी-यू-ट्यूब चाहे,
हिंदी की ताकत कम ना पाए।
तंबाकू से लेकर पर्यावरण तक,
हिंदी कलम लड़े हर मोर्चे पर।
आओ कर लें वादा साथी,
हिंदी पत्रकारिता रहे ना थकी।
डॉ संजीदा खानम शाहीन



