
देश के मध्य प्रदेश आदिवासी पिछड़े अंचल झाबुआ में रहकर सालों से आदिवासी जन जीवन और प्रेम, रूह प्रेम सृजन को सतत् साधना और तपस्या करते हुए डॉ रामशंकर चंचल ने,सचमुच बेहद सार्थक सृजन उपलब्धि हासिल किया है इस परम् सत्य को सादर प्रणाम, आज देश के इतिहास में पहली बार आदिवासी पिछड़े अंचल झाबुआ विश्व पटल पर दस्तक दे रहा है अपनी अद्भुत अनेक कृतियों के साथ, वही रूमानी प्रेम की कविता और कथाओं के माध्यम से सारे देश को विश्व को चौका देना वाला सत्य सृजन करते हुए डॉ रामशंकर चंचल ने वो इतिहास रचा है जो सदियों जिंदा रहेगा और आनेवाले युवा पीढ़ी को प्रेरित करने के साथ साहित्य से जोड़े रखेगा
इंकलाब पब्लिकेशन मुंबई जेसे देश के चर्चित बड़े प्रकाशक सागर ज़ख्मी साहब की अद्भुत अद्भुत भूमिका से प्रभावित यह सुखद अहसास कराती हुई रूह प्रेम कथाएं सचमुच युवा पीढ़ी के साथ साथ सभी के लिए प्रेरणा स्रोत है
यदि प्रेम सच्चा है सत्य है तो ईश्वरीय शक्ति रूह का सानिध्य प्राप्त होता ही है हर समय हर पल चाहिए बस आत्मा विश्वास सचित्र
जो आज के समय सपने जैसा लगता हैं या कोई कल्पना लगती हैं उन्हें जो, प्यार और प्रेम जैसे पावनता और पवित्रता से कोसों दूर है
यह कृति,वो गली, वो मकान देश और विश्व धरा पर दस्तक देती इसी बात को पूरी निष्ठा और आत्मा विश्वास से सामने रखती हैं और सहज सरल जीवंत सजीव उपस्थिति में पाठकों के दिल और दिमाग में छा जाती हैं
सचमुच बहुत बहुत सुंदर शुभ यादगार कलजयी कृति है जो सदियों स्मरण की जाएगी और प्रेरित करते हुए कल को सार्थक संदेश देगी
धन्य है झाबुआ आदिवासी पिछड़े अंचल जहां जन्म हुआ डॉ रामशंकर चंचल ने आज सम्पूर्ण विश्व में साहित्य जगत में चर्चित हो झाबुआ आदिवासी पिछड़े अंचल को अमर कर दिया जिसे कोई नहीं जानता था आज वह आदिवासी पिछड़े अंचल झाबुआ साहित्य जगत में चर्चा बन गया है और यह सब कुछ ईश्वर कृपा है और डॉ रामशंकर चंचल की पचास साल की अद्भुत साधना और तपस्या है जो सारी रात जाग कर नसीब हुई है
आज के समय ऐसे विरले साहित्य साधक कहां है जिन्होंने सम्पूर्ण जीवन साहित्य को समर्पित कर दिया और जीवन को सादगी लिए सालों से व्यतीत कर दिया
सचमुच बहुत वंदनीय हैं डॉ रामशंकर चंचल की अथक मेहनत परिश्रम निष्ठा और आत्मा विश्वास जुनून जो आज लाखों लाखों पाठकों को बांधे रखे है
समीक्षक, मनीषा चतुर्वेदी भीलवाड़ा राजस्थान




