साहित्य

अतीत से अब तक….फीफा विश्वकप

कार्तिकेय त्रिपाठी

कहते हैं जिंदगी चलते रहने का नाम है , थमना उसके बस में नहीं होता,यही उक्ति खेल पर भी लागू होती है ।पूरे डेड़ माह आईपीएल के साथ रतजगा ,उसकी विदाई के साथ ही फ्रांस में फ्रेंच ओपन टेनिस का आगाज और अब सिरहाने आ खडा़ है , विश्व का सर्वाधिक प्रतिष्ठित फुटबॉल महाकुंभ फीफा विश्व कप। फीफा विश्व कप फुटबॉल के 23 वें संस्करण का आगाज भी अब 11 जून से शुरू हो रहा है जहां विश्व की शीर्ष 48टीमें चमचमाती फीफा विश्व कप ट्रॉफी को अपने आगोश में समेटने के लिए बेताब होंगी और पूरे 39 दिन तक चलने वाले इस महाकुंभ का समापन होगा 19 जुलाई को जहां निश्चित होगा की इस इस विश्व कप का सरताज कौन बना फुटबॉल की रोमांचकता संघर्ष और अनिश्चितता के रहते हम किसी संभावित विजेता की भविष्यवाणी तो नहीं कर सकते किंतु इतना जरुर कह सकते हैं कि कौन सी टीम खिताब की दौड़ में होगी और कौन सी नहीं, फिलहाल यहां गत विश्वकप आयोजनों का संपूर्ण लेखा-जोखा मैं प्रस्तुत कर रहा हूं ।
ये विश्व कप आयोजन कहां – कहां हुए और किन पायदानों से गुजरते हुए यहां अंतिम विजेता विश्व के सामने आया ।
सबसे पहले बात करते हैं प्रथम विश्व कप महाकुंभ की ,जिसे जुले-रीमे विश्व कप नाम दिया गया था।
उरुग्वे विश्वकप 1930 – सबसे पहले आयोजन का श्रेय मिला उरुग्वे को , हालांकि इस समय फीफा फेडरेशन के 41 सदस्य देश थे,लेकिन सहमति मिली मात्र 13 देशों की , कारण था जल परिवहन और थकावट ,और जेट व्यवस्था न के बराबर, पर कुछ सुविधाएं तुरत-फुरत जुटाई गई ,और विश्व कप का आगाज संभव हो सका ।
13 टीमों को चार समूहों में बांटा गया ।क्रिकेट में 13 अंक को अशुभ माना जाता है पर यहां 13 टीम और पहला मेंच भी 13 जुलाई को फ्रांस व मैक्सिको के बीच हुआ,फ्रांस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 4-1 से मुकाबला जीत लिया ।अर्जेंटीना ने अपनी ख्याति के अनुरूप चिली फ्रांस और मैक्सिको को पराजय की गहरी खंदक मे धकेलकर सेमीफाइनल की और रुख किया । उरुग्वे ने पेरु व रुमानिया को कृमषः 1-0 व 4-0 से परास्त कर उनकी उम्मीदों को खत्म किया । युगोस्लाविया ने ब्राजील व बोलिविया को परास्त कर सेमीज में दाखिला लिया, तो अंतिम समूह से अमेरिका ने बेल्जियम व पराग्वे को कृमषः 3-0 व 1-0 से शिकस्त देकर सेमीज की राह पकडी़ ।
अमेरिका व उरुग्वे तो बिना गोल खाए यहां तक पहुंची , पर सेमीज में सारा गणित बिगड़ गया अमेरिका का ,जब उसे अर्जेंटीना ने 6-1 के विशाल अंतर से हराकर शर्मशार कर दिया ।अर्जेन्टिनाई खिलाडिय़ों के दमखम के सामने अमरीकी खिलाड़ियों की एक नहीं चली, उनकी ऊर्जा क्षण-क्षण कम होती गई ,उत्तरार्ध के 9 मिनट में तो अर्जेंटीना ने एक के बाद एक लगातार तीन गोल किए ।
दूसरा सेमीफाइनल 80 हजार दर्शकों के शोरगुल की उपस्थिति के बीच रोचकता लेकर प्रस्तुत हुआ।
उरुग्वे और युगोस्लाविया के बीच मैच में खेल की शुरुआत के 4 थे मिनट में सेकुलिक ने गोल कर दिया, लेकिन मेजबान उरुग्वे निराश नहीं हुआ और कुछ देर में उसने दो गोल कर बढ़त बनाई । और जब खेल समाप्ति का हूटर बजा तो परिणाम उरुग्वे के पक्ष में 6-1 लिखा था ।
अब बारी थी फाइनल की जिसका सारा विश्व इंतजार कर रहा था ।
30 जुलाई को उरुग्वे के मोंटेवीडियो शहर के खूबसूरत सेंटेनारियो स्टेडियम में स्पर्धा की आखरी जंग शुरु हुई ।दोनो पडो़सी देश फाइनल में थे ।पर मेंच में दोने टीमों ने अपनी गेंद से खेलने का दबाव बढा़या, अंततः निर्णय लिया गया कि , दोनो टीमें आधे-आधे समय अपनी गेंद से खेलेंगी।90,000हजार दर्शकों की उपस्थिति में खेल का रोमांच अपने पूरे चरम पर था , खेल के 12वें मिनट में ही उरुग्वे के पाब्लो डोरेडो ने गोल कर मेजबानी दर्शकों के उत्साह को बडा़ दिया, पर शीघ्र ही स्टेडियम में शांति छा गई जब अर्जेंटीना के प्यूसेले ने गोल दाग दिया, यही नहीं खेल के 35 वें मिनट में जांन लेजेंस ने करिश्माई गोल कर अर्जेंटीना को 2-1 से बढ़त भी दिला दी ,जो मध्यांतर तक बरकरार रही ।
लगातार दो बार के ओलंपिक चैंपियन उरुग्वे की प्रतिष्ठा दांव पर थी , उत्तरार्द्ध में उरुग्वे के खिलाड़ियों ने जोरदार हमला बोला और पेड्रोसिया ने गोल कर 2-2 की बराबरी की ,तो कुछ देर बाद ही इरियार्ते सेंटियोस ने गोल कर मेजबान देश को बढ़त भी दिला दी , खेल के अंतिम मिनट में केस्ट्रो हेक्टर ने गोल कर मेजबान दर्शकों की उत्तेजना को चरम पर ला दिया और इस तरह उरुगवे फुटबॉल विश्वकप का पहला विजेता बन गया ।
स्पर्धा में अर्जेंटीना के गुलेर्मो स्टेबिले सर्वाधिक 8 गोल करने में सफल रहे , और कुल 18 मेंचों में 70 गोल दर्शकों के दिलों की धडकनों को असंयत करने में सफल रहे । विश्व कप की अपार सफलता नें दूसरे विश्वकप 1934 का जिम्मा भी इटली को सोंप दिया….शेष कल..
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✍कार्तिकेय त्रिपाठी राम
इन्दौर 7869799232

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