
वक्त का पता नहीं चलता अपनो के साथ,
अपनो का पता चल जाता हैं वक्त के साथ।
छोटी सी बात है हर साथी साथ नहीं निभाता ।
अपना होके अपना पन नहीं जताता।
दिल को चूर के दिल के टुकड़े करता ।
ये वक्त की बात है, वक्त के हाल समझता ।
रिश्ते निभाने का मतलब ये नहीं सिर्फ खुशी में साथ निभाना ।
दुख में सिर्फ एक कदम चल ले टोह मंज़िल तय करता ।
ना रिश्तेदार खड़े होते हैं,
ना कोई सगा संबंधी ।
सिर्फ चक्रधारी का हाथ है सबपर,
भी कृपा बरसाते है हमपर।
इसको समझने में साल गुजर जाते है ।
अपने जो अस्ल में है ,
वो किया पता भूरे बनते जाते हैं।
सोच कर हसी आती हैं,
दद्वारिकाधीश की जगह सब सही लगते है,
अपने ओर अपने पर चक्रधारी पराये लगते है।
वक्त का पता नहीं चलता अपनो के साथ,
अपनो का पता चल जाता हैं वक्त के साथ।
– रिया राणावत
कालीदेवी, झाबुआ(मध्यप्रदेश)




