साहित्य

✝️ ईशू

चन्द्रगुप्त प्रसाद वर्मा

रूम के

दीवारे पे सजल,

क्रास पे लटकल

ईशू के न देख..।

सेठ नौकर पे

जोर से डपटल,

नौकर बेचारा-

डर के सिमटल।

उ मेज पे पड़ल

ईशू के उठइलस,

काँपत हाथ से

सेठ के दिखइलस।

नालायक!..

कामचोर!..

जउन चीज जहाँ से उठइले,

काँहें ना ओहिजा सहेजले ?

“टाँग दे ईशू के सलीब पे !”

नौकर भी हुकुम बजइलस,

ईशू के सलीब पे लटकइलस!!

 

✍️चन्द्रगुप्त प्रसाद वर्मा “अकिंचन”

चलभाष -९३०५९८८२५२

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