
गर्मी की अब छुट्टियां आई।
खुशियां बच्चों के मन में लाई।
पेड़ पर चढ़कर आम अमरूद हम तोड़े।
आंगन में हम झूला झूलें।
दादी नानी से सुनी कहानियां।
मौसी चाची से भी मिल आएं।
यूं ही घर में ऊधम मचाएं ।
इस तरह गर्मियों की छुट्टियां मनाएं।
आज के समय यह है सपना,
अब खेलने बाहर भी कोई न जाए।
नानी के घर भी अब कौन जाए।
अब तो बच्चे भी केवल मोबाइल चलाएं।
मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा




