साहित्य

रे मज़दूर- जानों अब तुम अपने सारे हक

डॉ अनुराधा

अनजान न रहो अपनी सुविधाओं से,

जानों अब तुम अपने सारे हक।

इसका गर करोगे सदुपयोग,

तुम समृद्ध होंगे अब बेशक।

 

बनाओ मज़दूर कार्ड अब अपना ।

तेरे उज्ज्वल भविष्य का है ये खजाना।

बनाओ इसे श्रम कार्यालय में,

होगा तेरा अता -पता सब इसमें।

 

शादी अपनी करनी है,

या अपने बच्चों की करानी है।

करानी अपने बच्चों की है पढ़ाई,

हर काम में कार्ड देगा साथ तुम्हें भाई।

 

कठिन बीमारी की हालत में भी,

मिलेगी अब निशुल्क चिकित्सा,

इस उपहार से ना रहेगा कोई गम।

हताश ना होजाओ कभी भी तुम।

 

बना पाओगे अपना आशियाना,

सरकार की भी है यही कामना।

बुढ़ापे में भी है अब तेरा सहारा,

भविष्य निधि का है सुदृढ़ आसरा।

 

काम करते हुए गर हुआ हादसा,

जीवन का भी है क्या भरोसा ?

अपंग हुए तो मिलेगा कार्ड से हरजाना,

मृतक के परिवार को भी है हरजाना।

 

फिर भी चिंतित क्यों हो मेरे भाई?

अक्लमंदी से करो अपनी भरपाई।

इन सुविधाओं के सटीक लाभ लिए,

पाओ फिर सम्मान अपने खोए हुए।

 

उदास न हो मज़दूर मेरे प्यारे,

बेशक अब तेरा मान बढ़ेगा।

बढ़ने से संसार में मान तेरा,

देश का सम्मान और बढ़ेगा।

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*©® ✍ डॉ अनुराधा के, डेनमार्क*

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