साहित्य

हर समय पर, साथ होती

डॉ रामशंकर चंचल 

अजीब रिश्ता होता हैं, सचमुच ईश्वर उपहार है रूह प्रेम, चौक जाता हूं अक्सर देख कर , बहुत समय बाद कुछ खाली पन महसूस कर रहा था

मन नहीं लग रहा था, क्यों नहीं जानता फिर कुछ देर बाद ऐसा लगना लगा जैसे तुम बहुत बहुत याद कर परेशान हो, मेरी चिंता लिए

शायद तुम परेशान हो यही वजह थी कि मैं दुःखी हो रहा था

दिल बैठा जा रहा था, लगता था क्या हो रहा यह, तभी अनायास दस्तक देती एक तस्वीर मेरे वाट्स पर आती हैं, जिसकी दूर दूर तक कोई संभावना नहीं थीं

खैर तस्वीर देख चौक जाता हूं

ऐसा लगा यही तो तुम हो, तुम्हें कैसे पता चल गया में परेशान हूं और तुरंत दस्तक देती चली आई

नहीं पता पर अद्भुत सत्य है कि वह तस्वीर में तुम साफ़ नज़र आ रही थी एक अद्भुत सुकून मिला अनायास ऊर्जा महसूस की उदासी देखते ही देखते खुशी में बदल गई

लगा सचमुच तुम हो सदा साथ पास यूं ही परेशानी से अनायास मुक्ति नहीं मिल जाती है कुछ तो है यह ईश्वरीय शक्ति रूह जिसे हर पल हर समय का ख्याल रहते हैं और साथ दे जिंदा रखें सक्रिय रखें ऊर्जा ताकत दे मुझे जीवंत रखें है

वंदनीय है यह ईश्वरीय शक्ति सत् सत् प्रणाम करता हूं सदा ही तुम्हे

बस सुकून है कि तुम साथ हो और हां और कब कुछ चाहा जो अब चाहूंगा,,,,,,,

डॉ रामशंकर चंचल

झाबुआ मध्य प्रदेश

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