
विषय- कहना मुझे सभी से यह धरा हमको
आज कहना, है सभी से यह धरा हमको तो पुकारे।
कह रही पर्यावरण को अब बचा जीवन को सुधारे।।
बात सच्ची जान लेना , साख दें चंदा सितारे।
रात सपनों से सुहाती, वह करे हमको इशारे।।
ताल सूखे अब नदी कल-, कल सुरों बहती कहाँ है।
पेड़ कहता आज सबसे , अब लगा रहते जहाँ हैं।।
आम पीपल आंवला को, अब लगा पानी वहीं है।
शुद्ध तन- मन से रहो तुम, योग जीवन भी यहीं हैं।।
मेध बरसे आज जमके, जब धरा पर प्रीति घोले
भोर की बेला सुहानी, सौम्य पुरवा पंख खोले।
रत्न सी प्राची दिशा है, फूल लतिका संग डोले।
देख उपवन मुग्ध होकर, भृंग कलियाँ गीत बोले।।
स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश




