
उदाहरण – संसार के सार शिव
ईश कर्ता कई नाम हैं।
आप ही देवता श्याम हैं।।
जुष्य जन्माधिए नाथ हैं।
सत्य आनंद भी साथ हैं।।
अंबिकाकांत आलोक हो।
कालकालाय त्रैलोक हो।।
क्षुब्ध क्षेमेंद्र गौविंद हो।
शक्ति के आप खाविंद हो।।
साधना सिद्धि दाता तुम्हीं।
मुक्ति कल्याण भाता तुम्हीं।।
योग के आप स्वामी बने ।
त्याग निष्काम से हो सने।।
चंद्र को शीश पै धारते।
हर्ष आशीष को वारते।।
प्रेम की ज्ञान की धार हो।
आप संसार के सार हो।
डॉमंजु गुप्ता
वाशी , नवी मुंबई




