
की पहली किरण जब धरती को जगाती है,
योग की हर साधना जीवन में चेतना लाती है.
नित्य योग-व्यायाम करें, यह केवल एक नारा नहीं,
स्वस्थ कल की ओर बढ़ने से सुंदर कोई सहारा नहीं.
जब मन उलझ जाए चिंताओं के घने अंधेरों में,
योग ही दीपक बन जलता है भीतर के बसेरों में.
ध्यान (मेडिटेशन) की शांति मन को निर्मल कर जाती है,
भीतर की बिखरी हुई दुनिया को फिर से संवारती है.
नित्य योग-व्यायाम करें, तन को नई उड़ान मिले,
थके हुए विश्वासों को फिर जीने की पहचान मिले.
यह शरीर रब की अनुपम सौगात कहलाता है,
योग.. उसे सम्मान देना और संवारना सिखाता है.
जहां दवाइयां हार मान लें, वहां अनुशासन काम करे,
हर दिन खुद के लिए कुछ पल, नित्य योग-व्यायाम करें.
सुख, शांति और शक्ति का जब मन से मन संगम होगा,
नित्य योग-व्यायाम और ध्यान से “मेजु”हर जीवन निरोग होगा.
महेजबीन मेहमूद राजानी “मेजु”
सड़क अर्जुनी
9423415191




