
#बलिदानदिवस
#दिनांक:24/06/26
#विषय:रानी दुर्गावती
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गोंडवाना की महान वीरांगना रानी दुर्गावती ने मुगल सेना के सामने आत्मसमर्पण के बजाय मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया था।
नरई नाले के तट पर जब, मुगल सेना ने घेरा डाला,महारानी दुर्गावती ने, रणचंडी बन उन्हें संभाला।
हाथी पर चढ़कर, दोनों हाथों से तलवारें वो बरसाती थीं,दुश्मन की विशाल सेना को, पल-पल में धूल चटाती थीं।
जब एक तीर आंख में लगा, तो वीरांगना ने धैर्य न खोया,मुगलों के आगे झुकने से बेहतर, प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया।
स्वाभिमान की अग्नि में, स्वयं कटार से ज्योति समाई,अमर गाथा बन गई, वह गढ़मंडला की महारानी।
वीरांगना रानी दुर्गावती की यह गाथा हमें मातृभूमि के प्रति असीम प्रेम और स्वाभिमान के लिए सदा प्रेरित करती है।
अदम्य साहस, वीरता और शौर्य की प्रतिमूर्ति रानी दुर्गावती जी के मातृभूमि की रक्षा के बलिदान पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
स्वरचित एवं मौलिक ✍️
संगीता वर्मा,कानपुर उत्तर प्रदेश




