
बनी साधिका शारदे मात तू , करो माँ सदा ज्ञान बरसात तू।
शरण में तुम्हारी सदा मैं रहूँ,पड़े मग चुनौती कहीं भी सहूँ।।
कला ज्ञान दे शारदे मात तू , करो माँ कृपा छंद बरसात तू।
सहारा मिले पास माँ के रहूँ, किनारा मिले दुःख मैं ही सहूँ।।(डॉ मंजु गुप्ता
जुड़े तार वीणा सहारा बने,सजे मन सदा शब्द सुर से सने।
रचूँ गीत तेरे निराले सभी,भरो नृत्य वादन उजाले अभी।।
करो माँ सदा मति हृदय मन विमल,रहे ज्ञान संसार में माँ नवल।
लगन मन सदा शारदे से जुड़े,कृपा कर न संगीत से मन मुड़े।।(डॉ मंजु गुप्ता)




